अनुक्रमणिका
संपादकीय
देश के अलग-अलग भू-भागों में भारतीय संस्कृति अपने अलग-अलग स्वरूप में संचरित होती रहती है। मदन मोहन मालवीय जी ने कहा है-“भारत की एकता का मुख्य आधार एक संस्कृति है, जिसका प्रवाह कहीं नहीं टूटा। यही इसकी विशेषता है। भारतीय एकता अक्षुण्ण है, क्योंकि भारतीय संस्कृति की धारा निरंतर बहती रही है और रहेगी।” हजारों वर्षों से सनातन संस्कृति की यह अमृत धारा भारत के कण-कण में निरंतर प्रवाहित होती रहती है। देखा जाए तो संस्कृति उस जल के समान है जो जिस भी पात्र में रखा जाता है वही आकार ग्रहण कर लेता है और उस पात्र को पूर्णता प्रदान करता है। भौगोलिक और राजनैतिक रूप से 1 नवंबर 2000 को अस्तित्व में आया छत्तीसगढ़ उस सुंदर फूल के समान खिला हुआ है जो अपनी संस्कृति के सुगंध से सजीव और सुवासित है।
मेसोपोटामिया के दजला फरात से लेकर सिंधु और गंगा तक अविरल प्रवाहित होने वाली मानव संस्कृति की एक प्रबल धारा महानदी, शिवनाथ और इंद्रावती नदियों के किनारे फल-फूल रही है। भूगोल ने छत्तीसगढ़ को एक सीमा में जहाँ आबद्ध किया, वहीं संस्कृति ने छत्तीसगढ़ी मिट्टी की सुगंध को भारत सहित समूचे विश्व में फैलाया। सरगुजा के पाट से बस्तर के हाट तक विस्तृत इंद्रधनुषीय संस्कृति के वैविध्य से छत्तीसगढ़िया लोक आलोकित है। सुआ गीत के ‘तरी हरी नाना रे नाना रे ना’ की स्वर लहरियाँ लोक जीवन के श्रम और सौंदर्य को अभिव्यक्त करती हैं।…
- (संपादकीय)- आचार्य (डॉ.) चन्दन कुमार
- 1. छत्तीसगढ़ी लोकगीतों में भारतीय संस्कृति की उपस्थिति- अर्चना त्रिपाठी
- 2. छत्तीसगढ़ का रामनामी संप्रदाय : जहाँ माटी का चोला भी है राम- अम्बरीश त्रिपाठी
- 3. छत्तीसगढ़ी संस्कृति की पहचान हैं ‘तीजन’- अल्पना त्रिपाठी
- 4. छत्तीसगढ़ का लोकप्रिय लोकनृत्य-पंथी- आस्था तिवारी
- 5. छत्तीसगढ़ी जन्म संस्कार : सोहर गीतों के आलोक में- उर्मिला शुक्ल
- 6. छत्तीसगढ़ का राज नृत्य ‘करमा’- ऋचा ठाकुर
- 7. बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है बस्तर दशहरा- ओम प्रकाश सोनी
- 8. छत्तीसगढ़ में कबीर पंथ- किशोर कुमार अग्रवाल
- 9. राउत नाचा- गौरी त्रिपाठी
- 10. सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक : दसमत कैना- जयप्रकाश साव
- 11. लोकगाथा भरथरी : नंदा जाहि का?- निर्वेश कुमार दीक्षित
- 12. सरगुजा के लोक जीवन में ‘राम’- पुनीत कुमार राय
- 13. बस्तर का ‘दियारी’ लोकपर्व- पूनम
- 14. संत गहिरा गुरु और उनका अवदान- प्रिया राय
- 15. प्रकृति की संस्कृति और संस्कृति की प्रकृति : छत्तीसगढ़िया मन- भुवाल सिंह ठाकुर
- 16. छत्तीसगढ़ की विशिष्ट लोकनाट्य परंपरा : रतनपुरिहा गम्मत- मिलिन्द अमृतफले
- 17. राउतनाचा में अभिव्यक्त होता छत्तीसगढ़ी लोक- मुरारी उपाध्याय
- 18. छत्तीसगढ़ की प्रदर्शनकारी लोक कलाएँ- राजन यादव
- 19. छत्तीसगढ़ में राम वनगमन पथ निर्माण का परिचयात्मक अध्ययन- राम किंकर पाण्डेय
- 20. छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधि लोकवाद्य- लिकेश्वर वर्मा
- 21. छत्तीसगढ़ी लोक-नृत्यगीत ‘सुआ’- विभाषा मिश्र
- 22. घोटुल : एक आदिवासी लोक संस्कृति- शंकर मुनि राय
- 23. छत्तीसगढ़ के पारंपरिक नृत्य- सरस्वती वर्मा
- 24. पंडवानी- सुधीर शर्मा