अनुक्रमणिका
संपादकीय
भारतबोध का यह प्रथम अंक है। आशा है कि संस्कृति, साहित्य, रंगमंच, मानविकी, समाज विज्ञान, लोकलालित्य, प्रदर्शनकारी कलाओं और शिल्प कलाओं की यह शोध पत्रिका आप सभी की बौद्धिक तथा लोकसांस्कृतिक जिज्ञासाओं को शांत करने का माध्यम बनेगी। कला, साहित्य और संस्कृति केंद्रित आलेखों द्वारा समस्त भारत के संवेदना-तंतुओं का संस्पर्श करने का उद्देश्य लेकर यह पत्रिका स्वयं को विस्तार देगी। पत्रिका में हिंदी एवं अंग्रेजी दोनों भाषाओं के शोधपत्रों को स्थान दिया जाएगा। इस अंक में हमारा प्रयास भारत से सहज अनुराग रखने वाले विद्वानों, जिज्ञासु अध्येताओं एवं शोधार्थियों को पत्रिका के माध्यम से एक वैचारिक मंच प्रदान करना है। यह अंक पूर्वोत्तर भारत के साहित्य और कला के साथ संवाद-कामना से निर्देशित है।…
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पूर्वोत्तर की कविता में देश-राग- प्रो. हरीशकुमार शर्मा
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भारतीय सांस्कृतिक बहुलता और पूर्वोत्तर की भाषाएं- प्रो. हितेंद्र मिश्र
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आदी धार्मिक लोकगाथाएं : एक अवलोकन- ईड़ परमे, प्रो. ओकेन लेगो
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तागिन लोकोक्तियां : परिचय, स्वरूप एवं विशेषताएं- डॉ. तारो सिन्दिक
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अरुणाचल प्रदेश के आदी जनजातीय लोकगीतों में अभिव्यक्त सामाजिक जीवन- बनश्री पर्तिन
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श्रीमंत शंकरदेव के राम- मणि कुमार
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असम के जनजातीय समाज में त्योहारों की प्रासंगिकता- डिम्पी बरगोहाई
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माजुली की मुखौटा कला- आदित्य कुमार मिश्र
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अरुणाचल प्रदेश की मिकिर जनजाति की एक झलक- सिमरन कुमारी
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सांस्कृतिक वैभव सम्पन्न मेघालय- प्रियंका शुक्ल
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मणिपुर का लोकनृत्य- वीरेन्द्र परमार
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पूर्वोत्तर भारत के समकालीन साहित्य में नारी संवेदना- रोजी कामेई
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तानी कथाएं- जोराम यालाम नाबाम
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नागार्जुन तथा बिष्णु प्रसाद राभा का काव्य : एक विवेचन – वहीदा परवेज़