अनुक्रमणिका
संपादकीय
पूर्वोत्तर और हिंदी के प्रेम की कहानी पुरानी है। पन्द्रहवीं शताब्दी में असमिया के एक बहुत प्रसिद्ध कवि हुए श्रीमंत शंकरदेव। श्रीमंत शंकरदेव असम सहित संपूर्ण प्राग्ज्योतिषपुर के समाज, साहित्य और जीवन-बोध के केंद्र में हैं। जब भक्तिकाल चल रहा था तब पूर्वोत्तर के साहित्य में शंकरदेव सक्रिय थे। शंकरदेव की रचनात्मकता ब्रजभाषा के राष्ट्रीय स्वरूप का प्रमाण है। असम में नव वैष्णव आंदोलन ब्रजबुलिरु/ब्रजावली में संभव होता है। ब्रजबुलिध्व्रजावली ब्रजभाषा, असमिया, मैथिली, संस्कृत और बांग्ला का सम्मिलित रूप है। शंकरदेव ने अपने जीवन में दो बार भारत का भ्रमण किया था। वे अपने साहित्य में कहीं भी असम शब्द का प्रयोग नहीं करते। भारतवर्ष उनकी रचनाधर्मिता के केंद्र में है। यही वह बिंदु है जहाँ से मैं पूर्वोत्तर और हिंदी के संबंध को समझता हूँ।
नवंबर 2017 की बात है। तेजपुर विश्वविद्यालय के अतिथि गृह के एक कमरे में मैं दयाल कृष्ण बोरा से बात कर रहा था। दयाल कृष्ण बोरा असमिया, हिंदी और ब्रजबुलि के विद्वान रहे। अब वे नश्वर शरीर में नहीं हैं। वे एकनाथ भगवती समाज से थे। असम के बरपेटा सत्र से संबंधित थे। सत्र बोले तो मठ। बरपेटा सत्र श्रीमंत शंकरदेव का कर्मस्थल रहा है। खैर, दयाल दा ने एक बात कही ‘चौबे जी, ज्योति अगरवाला के खिलाफ अगर आप कुछ बोलेंगे ना तो असम में आग लग जाएगी। ज्योति अगरवाला की बहुत प्रतिष्ठा है यहाँ’।
- 1. संपादक : आचार्य (डॉ.) चंदन कुमार
- 2. भारत में हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाया जाना चाहिए-सी. कामलोवा – आशुतोष
- 3.माजुली के हिंदी प्रचारक- माधूर्ज्य कमल हजारिका
- 4.पूर्वोत्तर भारत और हिंदी- प्रो. लालचंद राम
- 5.मिजोरम में हिंदी के बढ़ते चरण- प्रो. संजय कुमार
- 6.पूर्वोत्तर भारत का भाषाई परिदृश्य और हिंदी- प्रो. हितेंद्र कुमार मिश्र
- 7.त्रिपुरा में हिंदी के प्रति बढ़ती आत्मीयता-मुनीन्द्र मिश्र
- 8.मणिपुर में हिंदी की स्थिति- डॉ. ई. विजय लक्ष्मी
- 9.त्रिपुरा में हिंदी भाषा व साहित्य एक अवलोकन-डॉ. काली चरण झा
- 10.सिक्किम में हिंदी शिक्षण- Bses लेप्चा
- 11.त्रिपुरा में कला और हिंदी- डॉ. अमिता मिश्र
- 12.मणिपुर में हिंदी का परिदृश्य- डॉ. आर.के. मोबी सिंह
- 13.सिक्किम में हिंदी- सुवास दीपक
- 14.असम के मारवाड़ी समुदाय और हिंदी- जाहिदुल दीवान
- 15.पूर्वोत्तर भारत में हिंदी की विकास यात्रा- अनंत मिश्र
- 16.हिंदी भाषा और पूर्वोत्तर भारत कल, आज और कल- मीनाक्षी
- 17.देश को जोड़ती हुई पूर्वोत्तर की हिंदी- सूर्यप्रकाश