महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव केंद्रित विशेषांक

अनुक्रमणिका

संपादकीय

हमारा बौद्धिक दायित्व है कि हम देश के विभिन्न प्रांतों एवं उनमें बोली जाने वाली भाषाओं और मान्यताओं में निहित भारतीय सांस्कृतिक, धार्मिक, सामाजिक एकता के मूल्यों से संवाद करें, जो भारतभाव के हेतु हैं। इस उद्देश्य से भक्ति आंदोलन से बहुत कुछ सीखा जा सकता है क्योंकि भक्ति आंदोलन एक अखिल भारतीय स्वरूप ग्रहण करता है, जिसमें देश में पहली बार प्रांत भेद, जाति भेद, भाषा भेद, संप्रदाय भेद आदि से ऊपर उठकर राष्ट्रीय एकता, बंधुत्व और मानवता की बात की गई है। सभी संतों और भक्तों के चिंतन में अखंड भारत की सोच है, सांस्कृतिक एकता की भावना है। आज हम पूर्व-पश्चिम, उत्तर-दक्षिण चतुर्दिक भारत भाव को जीते हैं तो वह संतों और भक्तों का योगदान है।…

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