रानी दुर्गावती

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संपादकीय

‘भारतबोध’ पत्रिका का यह चौथा अंक है। यह अंक भी सुधि पाठकों के वैचारिक पटल को समृद्ध बनाने में सहायक सिद्ध हो यही प्रयास है। यह अंक भारत के इतिहास में वीरता, साहस और नेतृत्व का प्रतीक कही जाने वाली ‘रानी दुर्गावती’ को समर्पित है। इसका प्रमुख उद्देश्य है भारत की संपन्न और सुदृढ़ ऐतिहासिक विरासत को पाठकों के बीच उजागर कर उसे संरक्षण प्रदान करना। भारत की संपन्न ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में रानी दुर्गावती की जीवनी और उनकी वीरता का पुनरावलोकन करते हुए इतिहास में महिलाओं के योगदान को मान्यता और सम्मान देने की महत्वाकांक्षा को साकार करना है। आपको ज्ञात है कि भारतीय इतिहास में मुगल काल की अपनी एक महत्ता, विशेषताएं एवं कार्य हैं जो कि पाठकों के एक बड़े समूह को सहज ही अपनी ओर आकृष्ट करती हैं। रानी दुर्गावती की जीवन गाथा पर केन्द्रित ‘भारतबोध’ का प्रस्तुत अंक रानी दुर्गावती की विशेषता, उनके योगदान की महत्ता, और उनके व्यक्तित्व का विस्तृत विश्लेषण करता है। यह अंक इतिहास में मानव की सामाजिक, सांस्कृतिक एवं भावनात्मक अभिव्यक्ति को प्रदर्शित करता है। इतिहास सामाजिक जीवन के मूल्य की सम्यक संरचना का आधार है। किसी समाज की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि उसमें पाए जाने वाले उच्चतम मूल्य एवं आदर्श की वह चेतना है जो व्यक्ति को मनुष्य बनाए रखती है।…

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