भारतबोध – ब्रज के भक्त कवि

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संपादकीय

भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता उसकी निरंतरता, समन्वयशीलता और आध्यात्मिक चेतना है। “भारत ऋषियों-मुनियों की वसुधा है। चारों वेदों के मंत्रों तथा ऋचाओं के दृष्टा ऋषियों ने अपनी तपस्या से प्रकृति के रहस्यों का उद्घाटन किया। ब्राह्मण ग्रंथों तथा उपनिषदों के मंत्रों का प्रवर्तन भी ऋषियों की तपस्या का परिणाम है।” भारत को ऋषियों-मुनियों की पुण्यभूमि कहा गया है, जहाँ वेदों के मंत्रों और ऋचाओं के द्रष्टा महर्षियों ने अपनी आध्यात्मिक अनुभूति के द्वारा प्रकृति और जीवन के गूढ़ रहस्यों का उद्घाटन किया। ब्राह्मण ग्रंथों, आरण्यकों तथा उपनिषदों में निहित ज्ञान भी इसी ऋषि-परंपरा की साधना का प्रतिफल है। भारत की सांस्कृतिक चेतना केवल राजाओं, साम्राज्यों और युद्धों तक सीमित नहीं है, अपितु वह लोकजीवन, अध्यात्म, साहित्य और भक्त परम्परा की दीर्घ साधना से निर्मित हुई है। विशेषतः ब्रजभूमि में विकसित कृष्णभक्ति धारा ने भारतीय संस्कृति को एक नया सौंदर्यबोध प्रदान किया। ब्रज के भक्त कवियों ने श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं, रास-विलास और माधुर्य-भाव को अपनी काव्यसाधना का केंद्र बनाया। उनके काव्य में केवल ईश्वर-भक्ति ही नहीं, अपितु लोकजीवन, प्रकृति, करुणा और प्रेम की गहन अनुभूति भी व्यक्त हुई है। इस आत्मा को जीवित रखने का सबसे बड़ा कार्य ब्रज के संतों और भक्त कवियों ने किया ।

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“… मोहि ब्रज बिसरत नाहीं” 7 संपादकीय 

  1. आचार्य श्री रूपगोस्वामी

अमित सिंह (डॉ.)

  1. भक्त रसखान

अलका आनंद  (डॉ.)

  1. भक्त श्री विट्ठलनाथ गोस्वामी

आशुतोष तिवारी (डॉ.)

  1. ब्रज और भक्त मीराबाई

ओमवीर सिंह

  1. भक्त कवि श्री कुंभनदास

काजल

  1. भक्त श्री गोविंदस्वामी

किरण हजारिका (प्रो.)

  1. वैष्णव-काव्यकार श्री हित हरिवंश

कीरति बल्लभ देव पाठक

  1. भक्त कवयित्री ताज बीबी

चन्दन कुमार (आचार्य/डॉ.)

  1. भक्त श्री रघुनाथदास गोस्वामी

ज्योति कुमारी

  1. भक्त श्री कुंभनदास

नरेंद्र मिश्र (प्रो.)

  1. भक्त श्री कृष्णदास का ब्रजभाव

पवन कुमार (डॉ.)

  1. भक्त श्री स्‍वामी हरिदास

प्रमोद कुमार तिवारी (प्रो.)

  1. भक्त श्री सनातन गोस्वामी

भास्कर मिश्र (डॉ.)

  1. भक्त श्री रूप गोस्वामी

रवि कुमार (डॉ.)

  1. भक्त आचार्य श्री वल्लभाचार्य

रीना

  1. भक्त परमानंद दास

विक्की कुमार मद्धेशिया

  1. भक्त कवयित्री मीराबाई

विजय कुमार तिवारी (डॉ.)

  1. रसखान की भक्ति और राष्ट्रीयता

योगेन्द्र प्रताप सिंह (प्रो.)

  1. भक्त श्री चैतन्य महाप्रभु

योगेन्द्र भारद्वाज (डॉ.)

  1. भक्त कवि सूरदास

सूर्यकांत त्रिपाठी (प्रो.)

  1. भ्रमरगीत

सुनील बाबुराव कुळकर्णी ‘देशगव्हाणकर’ (प्रो.)

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