संपादकीय

भारतबोध का यह प्रथम अंक है। आशा है कि संस्कृति, साहित्य, रंगमंच, मानविकी, समाज विज्ञान, लोकलालित्य, प्रदर्शनकारी कलाओं और शिल्प कलाओं की यह शोध पत्रिका आप सभी की बौद्धिक तथा लोकसांस्कृतिक जिज्ञासाओं को शांत करने का माध्यम बनेगी। कला, साहित्य और संस्कृति केंद्रित आलेखों द्वारा समस्त भारत के संवेदना-तंतुओं का संस्पर्श करने का उद्देश्य लेकर यह पत्रिका स्वयं को विस्तार देगी। पत्रिका में हिंदी एवं अंग्रेजी दोनों भाषाओं के शोधपत्रों को स्थान दिया जाएगा। इस अंक में हमारा प्रयास भारत से सहज अनुराग रखने वाले विद्वानों, जिज्ञासु अध्येताओं एवं शोधार्थियों को पत्रिका के माध्यम से एक वैचारिक मंच प्रदान करना है। यह अंक पूर्वोत्तर भारत के साहित्य और कला के साथ संवाद-कामना से निर्देशित है।आगामी अंकों में ‘भारतबोध’ समस्त भारत से जुड़े शोध आलेखों को प्रोत्साहन प्रदान करेगी। इस पत्रिका को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, नई दिल्ली के मापदंडों के अनुसार एक ‘पीयर रिव्यूड एण्ड रेफ्रीड शोध पत्रिका’ के रूप में प्रकाशित किया जा रहा है।हिंदी समीक्षा परंपरा के आद्याचार्य रामचन्द्र शुक्ल के साहित्य संबंधी विचारों को आत्मसात करते हुए ‘भारतबोध’ जनता की चित्तवृत्तियों के संचित प्रतिबिम्ब’ से स्वयं को प्रतिभासित करेगी तथा अपनी विचार सरणियों में भारतीय मूल्यों को सांस्कृतिक विस्तार प्रदान करेगी, ऐसी कामना है।यह पत्रिका विद्वानों, भारतीय संस्कृति के सुधी चिंतकों, कला के मर्मज्ञों की प्रतिष्ठा के लिए प्रयासरत रहेगी। पत्रिका के प्रत्येक पक्ष को उत्कृष्ट बनाने हेतु हमारी संपादकीय समिति निरंतर प्रयत्न कर रही है। पत्रिका को बेहतर बनाने के लिए आपके सुझावों, आवश्यक परामर्शों का सदैव स्वागत किया जाएगा।हमारे प्रयासों से प्रारंभ हुई ‘भारतबोध’ आप सभी की अपनी पत्रिका बने – ऐसी कामना है।’आकल्पं रविमेव भास्वनकरी भारतबोध’(यह भारतबोध कल्पपर्यंत सूर्य के समान प्रकाशित होती रहे।

आचार्य (डॉ.) चंदन कुमार

आचार्य, हिंदी, कला संकाय,दिल्ली विश्वविद्यालय दिल्ली-110007

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